हरयाणे की माटी, हमारी पहचान
दूध-दही का खाणा, यो सै म्हारा हरयाणा!
लोक संगीत और रागनी की गूंज
लखमीचंद, मेहर सिंह व मांगेराम के कालजयी बोल
समृद्ध हरयाणवी लोक शब्दकोश
600+ ठेठ ग्रामीण शब्दां के हिंदी व अंग्रेजी अर्थ
ठेठ हरयाणवी शब्द का अर्थ खोजो
आज का हरयाणवी ज्ञान
नदी
(ndee)
हिंदी अर्थ:
नदी / सरिता
"यमुना नदी हरयाणे में बहती सै।"
धरती माँ की रागनी
सांगी/कलाकार: पंडित लखमीचंद
"धरती माँ जैसी कोई ना माँ, सब कुछ दे दिया इस माँ ने। हरयाणे की सोने की धरती, हर बेटे को पाल दिया इस माँ ने। गेहूं धान बाजरा उगाया, खेत-खलिहान हरे कर दिए। म्हारी माटी की महक न्यारी, जन्म से मरण तक प्यार दिए।"
"जो बोले सो निहाल, सत श्री अकाल।"
— गुरु गोबिंद सिंह
म्हारा अमर सांगी व कवि
हरयाणे की माटी के वे अमर कवि अर सांगी, जिन्नां नै सांग कला अर म्हारी बोली नै पूरी दुनिया म्ह चमकाया।
Anup Singh Yadav
(1965 - Present)
"धर्म पे अडिग रहण की बातें, लखमीचंद सुणावेगा। सत की खातर राज गंवाया, वो जग में यश पावेगा।"
Agricultural Haryana themes. Birthplace: Rewari (1965). Genre: Rural Contemporary.
चोटी के लेखक
किताबां का संग्रह
Haryana Ki Lok Kathaein
Ramesh Dugal
Haryana Ka Itihas
Amar Singh
Lakhmi Chand: Jeevan aur Kavya
Mahavir Singh
Haryanvi Lok Sangeet Ka Adhyayan
Om Prakash Grewal
The Haryanvis: A Sociological Study
R.S. Mann
Haryana: History, Culture and Administration
Suraj Bhan Bhardwaj
ताऊ जी से किसी ने पूछा - ताऊ, थारे घर में कितने लोग हैं?
👉 ताऊ बोले - बेटा, जो खाणा खाने बैठते हैं वो 10 हैं, और जो पाँव फैलाकर सोते हैं वो 15। अब तू गिन ले।