हरयाणे की माटी, हमारी पहचान

Haryanvi Culture, Language, and Heritage Archive

लोक संगीत और रागनी की गूंज

Experience the Authentic Sound of Haryana

समृद्ध हरयाणवी लोक साहित्य

From Historic Saang to Modern Poetry

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हरयाणवी शब्दकोश

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विशेष प्रस्तुति

आज का कवि

हरयाणे की धरती के उन महान कवियों और सांगकारों की स्मृति जिन्होंने हमारी संस्कृति को सींचा।

Anup Singh Yadav

Anup Singh Yadav

(1965 - Present)

लोक रागनी अंश: सत्यवादी हरिश्चंद्र सांग

"धर्म पे अडिग रहण की बातें, लखमीचंद सुणावेगा। सत की खातर राज गंवाया, वो जग में यश पावेगा।"

Agricultural Haryana themes. Birthplace: Rewari (1965). Genre: Rural Contemporary.

साहित्य धरोहर

किताबों का संग्रह

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Folk Literature

Haryana Ki Lok Kathaein

Ramesh Dugal

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History

Haryana Ka Itihas

Amar Singh

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Biography/Literary

Lakhmi Chand: Jeevan aur Kavya

Mahavir Singh

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Music/Folklore

Haryanvi Lok Sangeet Ka Adhyayan

Om Prakash Grewal

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Sociology

The Haryanvis: A Sociological Study

R.S. Mann

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History/Reference

Haryana: History, Culture and Administration

Suraj Bhan Bhardwaj

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इस हफ्ते की रागनी

धरती माँ की रागनी

प्रस्तुति: पंडित लखमीचंद

धरती माँ जैसी कोई ना माँ, सब कुछ दे दिया इस माँ ने। हरयाणे की सोने की धरती, हर बेटे को पाल दिया इस माँ ने। गेहूं धान बाजरा उगाया, खेत-खलिहान हरे कर दिए। म्हारी माटी की महक न्यारी, जन्म से मरण तक प्यार दिए।

आज का चुटकुला

हरयाणवी हास्य व्यंग्य

श्रेणी: गामा आले

ताऊ जी से किसी ने पूछा - ताऊ, थारे घर में कितने लोग हैं?

ताऊ बोले - बेटा, जो खाणा खाने बैठते हैं वो 10 हैं, और जो पाँव फैलाकर सोते हैं वो 15। अब तू गिन ले।

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