हरयाणवी कविता संग्रह
हमारी अनमोल रागनियाँ, लोकगीत और आधुनिक कविताओं का संकलन जो हरयाणवी सभ्यता को दर्शाता है।
गुरु की महिमा
कृष्ण लाल भाट
गुरु बिना ज्ञान कहाँ से पाओगे, अँधेरे में भटकोगे रे। कृष्ण लाल भाट कहे सुनो भाई, गुरु के बिना अटकोगे रे। गुरु वो दीपक जो जलाता राह, जीवन से भटकोगे रे। गुरु चरण में शीश नवाओ, गुरु बिन नहीं पटकोगे रे।
हरयाणे की वीरांगना
धर्मपाल सांगवान
हरयाणे की वीरांगना नारी, लाज-मान की रखवाली। संकट में भी डोली ना जो, करती दुश्मन की बर्बाली। धर्मपाल कहे याद करो उन्हें, जिन्होंने खाई रे खाली। इतिहास में लिखी हैं जो, वीरांगना की अमर कहानी।
सत्संग की महिमा
संत गोपालदास
सत्संग में बैठो भाई सदा, मन मैला होय ना। संत गोपालदास कहे सुनो, बुरे कर्म कभी होय ना। साधु-संगत में मिले शांति, मन भटकाव होय ना। ईश्वर के द्वार पहुँचोगे तुम, फिर कभी कोई रोय ना।
धरती माँ का प्यार
रणबीर सिंह बड़वासणी
धरती माँ जसी माँ कोई ना, पाल्या सारे जग को। रणबीर कहे सुनो भाई मेरे, देदी सब कुछ इस बग को। खेत-बाग उगाए अन्न सारा, भर दिया जग की थाळी। धरती माँ को नमन करो तुम, होय ना इसकी खाली।
नल-दमयंती
पंडित लखमीचंद
नल राजा बड़ा धर्मी था भाई, पर भाग्य ने मार दी ठोकर। जुए में राज्य हार गया राजा, वन में आई ज़िंदगी खोकर। दमयंती पत्नी सती नारी, साथ चली दुख पाकर। लखमीचंद ने गाई कथा यह, सत्य-धर्म की राह दिखाकर।
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चोटी के कवि
अली बख्श
(1918 - 1982)
अली बख्श हरयाणवी के प्रसिद्ध रागनी गायक थे जिन्होंने गंगा-जमुनी तहजीब को अपनी रचनाओं में उकेरा। इनकी रागनियाँ हिंदू-मुस्लिम एकता की मिसाल हैं।
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