साहित्य धरोहर

हरयाणवी कविता संग्रह

हमारी अनमोल रागनियाँ, लोकगीत और आधुनिक कविताओं का संकलन जो हरयाणवी सभ्यता को दर्शाता है।

कविता

किसान की व्यथा

मान सिंह

बादल बरसे ना बिना पाणी रे, खेत रह्या सूखा तरसावण आळा। कर्ज बढ्या जड़ां तक पहुंचा, साहूकार आया रोज लगावण आळा। पर हाथ ना रुकेंगे म्हारे, खेत जोतूंगा डट जावण आळा। धरती माँ की लाज राखूंगा, या मिट्टी कदे ना बेचावण आळा।

कविता

गाँव की चौपाल

दयाचंद मायना

चौपाल में बैठे बड़े-बुजुर्ग, हुक्का गुड़गुड़ाता बातां करैं। बीती बातां की यादां ताज़ी, नई पीढ़ी को राह दिखावैं। नीम के नीचे बैठे मिलकर, गाँव की तकदीर लिखावैं। यो चौपाल म्हारी पाठशाला, जहाँ जीवन के पाठ पढ़ावैं।

कविता

राम की महिमा

बाजे भगत

राम नाम रटले प्रतिदिन भाई, यो जीवन दिन चार का। सांसों की माला जपता जा, मिलेगा फल परिवार का। बाजे भगत कहे सुनो बंधु, धर्म ही सार संसार का। मन में बसा ले राम को अपने, यो मन है आधार परमार का।

कविता

माँ की ममता

दीपचंद बहमन

माँ तू धरती-सी सहनशील, आंचल में जग भर का प्यार। रात-रात भर जाग के पाला, दूध पिला के दिया सुधार। तेरी कोख से जनम लिया मैं, तेरे चरणां में संसार। दीपचंद कहे माँ के आगे, क्या दूँ तुझे तोहफा उपहार।

कविता

वसंत का स्वागत

रामकिशन व्यास

फूल खिले रे सरसों के खेत में, पीला बसंत आया। कोयल गाई अमुआ की डाली पर, नया मौसम ले आया। गाँव की गलियाँ महकी-महकी, खेत में मेला लाया। रामकिशन व्यास गाये रागनी, कुदरत ने प्यार जताया।

कविता

ईश्वर की भक्ति

अली बख्श

हरि का नाम सुमर ले बंदे, या दुनिया सब झूठ। धन-दौलत तो यहीं रह जाएगी, साथ चलेगा कूट। अली बख्श कहे भजन करले, मन का मत हो मोहर। रब की राह पर चल बंदे, कर दे अपना कोहर।

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चोटी के कवि

अली बख्श

अली बख्श

(1918 - 1982)

अली बख्श हरयाणवी के प्रसिद्ध रागनी गायक थे जिन्होंने गंगा-जमुनी तहजीब को अपनी रचनाओं में उकेरा। इनकी रागनियाँ हिंदू-मुस्लिम एकता की मिसाल हैं।

कवियों की जीवनी

नल-दमयंती

लेखक: पंडित लखमीचंद

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नल राजा बड़ा धर्मी था भाई, पर भाग्य ने मार दी ठोकर। जुए में राज्य हार गया राजा, वन में आई ज़िंदगी खोकर। दमयंती पत्नी सती नारी, साथ चली दुख पाकर। लखमीचंद ने गाई कथा यह, सत्य-धर्म की राह दिखाकर।

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