साहित्य धरोहर

हरयाणवी कविता संग्रह

हमारी अनमोल रागनियाँ, लोकगीत और आधुनिक कविताओं का संकलन जो हरयाणवी सभ्यता को दर्शाता है।

कविता

म्हारा हरयाणा

पंडित लखमीचंद

म्हारा हरयाणा सोने की चिड़िया, जिब्रा रे जैसा हिरणां का मेला। दूध-दही की म्हारी धरती, हर खेत में सोना उगला जे। कुरुक्षेत्र की पवित्र भूमि पर, गीता का संदेश मिला जे। पंडित लखमीचंद की रागनी में, हरयाणे का नाम चला जे।

कविता

वसंत का स्वागत

रामकिशन व्यास

फूल खिले रे सरसों के खेत में, पीला बसंत आया। कोयल गाई अमुआ की डाली पर, नया मौसम ले आया। गाँव की गलियाँ महकी-महकी, खेत में मेला लाया। रामकिशन व्यास गाये रागनी, कुदरत ने प्यार जताया।

रागनी

यारी की रागनी

सुल्तान सिंह

यारी बड़ी अनमोल चीज है, सच्चा यार मिले ना सबको। सुल्तान सिंह कहे सुन दोस्त, झूठी यारी ठगे तबको। सच्चा यार वो जो साथ रहे, मुसीबत में भी लड़े तबको। ऐसे यार को साँस में रखो, जो दिल से चाहे मनको।

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चोटी के कवि

अली बख्श

अली बख्श

(1918 - 1982)

अली बख्श हरयाणवी के प्रसिद्ध रागनी गायक थे जिन्होंने गंगा-जमुनी तहजीब को अपनी रचनाओं में उकेरा। इनकी रागनियाँ हिंदू-मुस्लिम एकता की मिसाल हैं।

कवियों की जीवनी

वसंत का स्वागत

लेखक: रामकिशन व्यास

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फूल खिले रे सरसों के खेत में, पीला बसंत आया। कोयल गाई अमुआ की डाली पर, नया मौसम ले आया। गाँव की गलियाँ महकी-महकी, खेत में मेला लाया। रामकिशन व्यास गाये रागनी, कुदरत ने प्यार जताया।

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