साहित्य धरोहर

हरयाणवी कविता संग्रह

हमारी अनमोल रागनियाँ, लोकगीत और आधुनिक कविताओं का संकलन जो हरयाणवी सभ्यता को दर्शाता है।

कविता

वसंत का स्वागत

रामकिशन व्यास

फूल खिले रे सरसों के खेत में, पीला बसंत आया। कोयल गाई अमुआ की डाली पर, नया मौसम ले आया। गाँव की गलियाँ महकी-महकी, खेत में मेला लाया। रामकिशन व्यास गाये रागनी, कुदरत ने प्यार जताया।

कविता

ईश्वर की भक्ति

अली बख्श

हरि का नाम सुमर ले बंदे, या दुनिया सब झूठ। धन-दौलत तो यहीं रह जाएगी, साथ चलेगा कूट। अली बख्श कहे भजन करले, मन का मत हो मोहर। रब की राह पर चल बंदे, कर दे अपना कोहर।

कविता

मजदूर की पीड़ा

मांगेराम

हाथ में छाले पाँव में फफोले, पर हौसला है आसमान। मजदूर बनाता महल-अटारी, खुद रहता कच्चे मकान। मांगेराम कहे सुनो ध्यान से, मजदूर है देश की शान। इसका पसीना सींचे धरती, इसके हाथ बने महान।

कविता

गुरु की महिमा

कृष्ण लाल भाट

गुरु बिना ज्ञान कहाँ से पाओगे, अँधेरे में भटकोगे रे। कृष्ण लाल भाट कहे सुनो भाई, गुरु के बिना अटकोगे रे। गुरु वो दीपक जो जलाता राह, जीवन से भटकोगे रे। गुरु चरण में शीश नवाओ, गुरु बिन नहीं पटकोगे रे।

कविता

हरयाणे की वीरांगना

धर्मपाल सांगवान

हरयाणे की वीरांगना नारी, लाज-मान की रखवाली। संकट में भी डोली ना जो, करती दुश्मन की बर्बाली। धर्मपाल कहे याद करो उन्हें, जिन्होंने खाई रे खाली। इतिहास में लिखी हैं जो, वीरांगना की अमर कहानी।

कविता

सत्संग की महिमा

संत गोपालदास

सत्संग में बैठो भाई सदा, मन मैला होय ना। संत गोपालदास कहे सुनो, बुरे कर्म कभी होय ना। साधु-संगत में मिले शांति, मन भटकाव होय ना। ईश्वर के द्वार पहुँचोगे तुम, फिर कभी कोई रोय ना।

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चोटी के कवि

अली बख्श

अली बख्श

(1918 - 1982)

अली बख्श हरयाणवी के प्रसिद्ध रागनी गायक थे जिन्होंने गंगा-जमुनी तहजीब को अपनी रचनाओं में उकेरा। इनकी रागनियाँ हिंदू-मुस्लिम एकता की मिसाल हैं।

कवियों की जीवनी