साहित्य धरोहर

हरयाणवी कविता संग्रह

हमारी अनमोल रागनियाँ, लोकगीत और आधुनिक कविताओं का संकलन जो हरयाणवी सभ्यता को दर्शाता है।

रागनी

यारी की रागनी

सुल्तान सिंह

यारी बड़ी अनमोल चीज है, सच्चा यार मिले ना सबको। सुल्तान सिंह कहे सुन दोस्त, झूठी यारी ठगे तबको। सच्चा यार वो जो साथ रहे, मुसीबत में भी लड़े तबको। ऐसे यार को साँस में रखो, जो दिल से चाहे मनको।

कविता

धरती माँ का प्यार

रणबीर सिंह बड़वासणी

धरती माँ जसी माँ कोई ना, पाल्या सारे जग को। रणबीर कहे सुनो भाई मेरे, देदी सब कुछ इस बग को। खेत-बाग उगाए अन्न सारा, भर दिया जग की थाळी। धरती माँ को नमन करो तुम, होय ना इसकी खाली।

कविता

नल-दमयंती

पंडित लखमीचंद

नल राजा बड़ा धर्मी था भाई, पर भाग्य ने मार दी ठोकर। जुए में राज्य हार गया राजा, वन में आई ज़िंदगी खोकर। दमयंती पत्नी सती नारी, साथ चली दुख पाकर। लखमीचंद ने गाई कथा यह, सत्य-धर्म की राह दिखाकर।

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चोटी के कवि

अली बख्श

अली बख्श

(1918 - 1982)

अली बख्श हरयाणवी के प्रसिद्ध रागनी गायक थे जिन्होंने गंगा-जमुनी तहजीब को अपनी रचनाओं में उकेरा। इनकी रागनियाँ हिंदू-मुस्लिम एकता की मिसाल हैं।

कवियों की जीवनी