साहित्य धरोहर

हरयाणवी कविता संग्रह

हमारी अनमोल रागनियाँ, लोकगीत और आधुनिक कविताओं का संकलन जो हरयाणवी सभ्यता को दर्शाता है।

कविता

म्हारा हरयाणा

पंडित लखमीचंद

म्हारा हरयाणा सोने की चिड़िया, जिब्रा रे जैसा हिरणां का मेला। दूध-दही की म्हारी धरती, हर खेत में सोना उगला जे। कुरुक्षेत्र की पवित्र भूमि पर, गीता का संदेश मिला जे। पंडित लखमीचंद की रागनी में, हरयाणे का नाम चला जे।

कविता

किसान की व्यथा

मान सिंह

बादल बरसे ना बिना पाणी रे, खेत रह्या सूखा तरसावण आळा। कर्ज बढ्या जड़ां तक पहुंचा, साहूकार आया रोज लगावण आळा। पर हाथ ना रुकेंगे म्हारे, खेत जोतूंगा डट जावण आळा। धरती माँ की लाज राखूंगा, या मिट्टी कदे ना बेचावण आळा।

कविता

देश की आन

फौजी मेहर सिंह

देश की खातर प्राण न्यौछावर, फौजी की जान देश के लिए जावे। सरहद पे खड़ा रक्षक हमारा, ठंड में सूरज-सा तपता जावे। माँ की आँखें रोज राह देखें, पति की गोरी आस लगावे। देश की माटी में मिल जावे, शहीद का नाम अमर हो जावे।

कविता

गाँव की चौपाल

दयाचंद मायना

चौपाल में बैठे बड़े-बुजुर्ग, हुक्का गुड़गुड़ाता बातां करैं। बीती बातां की यादां ताज़ी, नई पीढ़ी को राह दिखावैं। नीम के नीचे बैठे मिलकर, गाँव की तकदीर लिखावैं। यो चौपाल म्हारी पाठशाला, जहाँ जीवन के पाठ पढ़ावैं।

कविता

राम की महिमा

बाजे भगत

राम नाम रटले प्रतिदिन भाई, यो जीवन दिन चार का। सांसों की माला जपता जा, मिलेगा फल परिवार का। बाजे भगत कहे सुनो बंधु, धर्म ही सार संसार का। मन में बसा ले राम को अपने, यो मन है आधार परमार का।

कविता

माँ की ममता

दीपचंद बहमन

माँ तू धरती-सी सहनशील, आंचल में जग भर का प्यार। रात-रात भर जाग के पाला, दूध पिला के दिया सुधार। तेरी कोख से जनम लिया मैं, तेरे चरणां में संसार। दीपचंद कहे माँ के आगे, क्या दूँ तुझे तोहफा उपहार।

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चोटी के कवि

अली बख्श

अली बख्श

(1918 - 1982)

अली बख्श हरयाणवी के प्रसिद्ध रागनी गायक थे जिन्होंने गंगा-जमुनी तहजीब को अपनी रचनाओं में उकेरा। इनकी रागनियाँ हिंदू-मुस्लिम एकता की मिसाल हैं।

कवियों की जीवनी

गुरु की महिमा

लेखक: कृष्ण लाल भाट

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गुरु बिना ज्ञान कहाँ से पाओगे, अँधेरे में भटकोगे रे। कृष्ण लाल भाट कहे सुनो भाई, गुरु के बिना अटकोगे रे। गुरु वो दीपक जो जलाता राह, जीवन से भटकोगे रे। गुरु चरण में शीश नवाओ, गुरु बिन नहीं पटकोगे रे।

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