लोक संस्कृति

हरयाणवी रागनी अर्काइव्स

\"रागनी हरयाणवी लोक संस्कृति की आत्मा है...\" सांग कला की पारंपरिक संगीतमय धुनों, प्रसिद्ध किस्सों और ऐतिहासिक गीतों के बोलों (Lyrics) का संपूर्ण संकलन।

रागनी संग्रह सूची

शास्त्रीय

धरती माँ की रागनी

Performer: पंडित लखमीचंद

धरती माँ जैसी कोई ना माँ, सब कुछ दे दिया इस माँ ने। हरयाणे की सोने की धरती, हर बेटे को पाल दिया इस माँ ने। गेहूं धान बाजरा उगाया, खेत-खलिहान हरे कर दिए। म्हारी माटी की महक न्यारी, जन्म से मरण तक प्यार दिए।

वीर रस

फौजी की रागनी

Performer: फौजी मेहर सिंह

देश की खातर जाऊंगा म्हारी माँ, सरहद पे लड़ूंगा जाकर। दुश्मन को मुंह तोड़ जवाब दूंगा, शहीद हो जाऊंगा मरकर। तू आँसू मत बहा म्हारी माँ, तेरा बेटा वीर है जाकर। म्हारे देश की शान रखूंगा, तिरंगे में लिपटूंगा आकर।

आधुनिक

गाँव की चौपाल

Performer: दयाचंद मायना

चौपाल में बैठे बड़े-बुजुर्ग, हुक्के की नल गड़गड़ाती। खेत-खलिहान की बात करते, बारिश की राह मन में जाती। नीम की छाया में बैठे सब, गाँव की पंचायत लगती। यो चौपाल हमारी पाठशाला, जहाँ जिंदगी की राह मिलती।

आधुनिक

बेटी की रागनी

Performer: धर्मपाल सांगवान

बेटी है तो कल है म्हारा, बेटी पढ़ेगी तो घर चमकेगा। छोरी को मत समझो भार, इसके कारण गाँव दमकेगा। डॉक्टर इंजीनियर बनेगी यो, देश का नाम रोशन करेगी। साक्षी मलिक सी बेटी म्हारी, ओलंपिक में मेडल लावेगी।

शास्त्रीय

कृष्ण की रागनी

Performer: बाजे भगत

कुरुक्षेत्र की भूमि पर, कृष्ण ने गीता सुनाई। अर्जुन का मन डोल गया, कृष्ण ने राह दिखाई। कर्म करो फल की चिंता मत, यही बात समझाई। बाजे भगत ने गाई कथा यह, म्हारे हरयाणे में आई।

आधुनिक

किसान की रागनी

Performer: मांगेराम

खेत में हल चलाता किसान, पसीना बहाता दिन-रात। आसमान से बादल माँगे, कर ईश्वर से की जाए बात। फसल उगाई पूरे जतन से, बाजार में नहीं मिला दाम। मांगेराम कहे सुनो सरकार, किसान करे तो क्या काम?

श्रृंगार

प्रेम की रागनी

Performer: सुल्तान सिंह

प्रेम का रंग निराला है, प्रेम में दुनिया भूल जाते। जब दो मन एक हो जाते हैं, खुशी के गीत खूब गाते। सुल्तान सिंह कहे प्रेम सच्चा, कभी झूठ नहीं बोलता। सच्चे प्रेम की राह पर चलकर, मन का ताला आप खुलता।

भक्ति

संत की रागनी

Performer: संत गोपालदास

ईश्वर एक है भाई, लड़ो मत धर्म के नाम पर। हिंदू-मुस्लिम सब एक हैं, चलो मिलकर काम पर। संत गोपालदास कहे सुनो, मनुष्यता ही धर्म सबसे बड़ा। प्रेम से रहो इस दुनिया में, रहे हमेशा रिश्ता जुड़ा।

आधुनिक

मेले की रागनी

Performer: मान सिंह

हरयाणे का मेला लागा, ढोल-ढमाके बज रहे। नाच-गान और रंग-बिरंगी, हर तरफ झूले झूल रहे। फूलों की बहार आई, सब मिलकर खूब झूम रहे। यो हरयाणा का मेला सुंदर, सबके मन में खुशी भर रहे।

आधुनिक

पानी की रागनी

Performer: रणबीर सिंह बड़वासणी

पाणी बचाओ भाई-बहनो, यो धन सबसे अनमोल। बूंद-बूंद को जोड़ के रखो, पाणी ही जीवन का मोल। नहर खेत सींचते जावे, कुएं से मीठा जल टोल। रणबीर कहे सुनो सब मिलकर, पाणी के बिना होगा रोल।

किसान की रागनी

गायक/परफॉर्मर: मांगेराम

बंद करें

खेत में हल चलाता किसान, पसीना बहाता दिन-रात। आसमान से बादल माँगे, कर ईश्वर से की जाए बात। फसल उगाई पूरे जतन से, बाजार में नहीं मिला दाम। मांगेराम कहे सुनो सरकार, किसान करे तो क्या काम?