लोक संस्कृति

हरयाणवी रागनी अर्काइव्स

\"रागनी हरयाणवी लोक संस्कृति की आत्मा है...\" सांग कला की पारंपरिक संगीतमय धुनों, प्रसिद्ध किस्सों और ऐतिहासिक गीतों के बोलों (Lyrics) का संपूर्ण संकलन।

इस हफ्ते की रागनी

बेटी है कुल का मान (सांग भ्रूण हत्या विरोध)

गायक/परफॉर्मर: धर्मपाल सांगवान

Category: आधुनिक

बेटी कुल की लाज होती सै, बेटी कुल का मान सै, कोख में मत मारो इसको, यह ईश्वर का वरदान सै॥ पढ़-लिखकर जब बेटी आगे, नया मुकाम बनाती सै, दो-दो कुलों को तार के जग में, रोशन नाम कराती सै। कल्पना चावला बनी सितारा, गीता-बबीता बनी पहलवान, हर क्षेत्र में परचम लहराया, बढ़ाया भारत देश की शान॥ धर्मपाल कहे कर जोड़ के, बेटी को सम्मान दो, बेटे जैसा प्यार देकर, सपनों को उड़ान दो। जिस घर में बेटी का आदर, वहाँ लक्ष्मी का वास रहे, सदा खुशी और बरकत बरसे, मंगलमय उल्लास रहे॥

रागनी संग्रह सूची

आधुनिक

गाँव का बचपन और चौपाल की यादें

Performer: धर्मपाल सांगवान

गाँव का वो भोला बचपन, चौपाल की वो मीठी बातें, कहाँ खो गईं वो खुशियाँ, कहाँ गईं वो शीतल रातें॥ कंचे खेलना, गिल्ली-डंडा, बागों से आम चुराना, ताई के हाथ का माखन और, गुड़ की रोटी खाना। आज शहर की भीड़ में खोकर, दिल रोता है पछताता है, गाँव की वो मिट्टी की खुशबू, रह-रह के याद आता है॥ धर्मपाल सांगवान कहे भाई, गाँव की जड़ को मत छोड़ो, अपनी संस्कृति और धरोहर से, कभी ना नाता तोड़ो। पीपल की छांव चौपाल का ठाठ, दुनिया में कहीं नहीं पावे, गाँव का भोला भाईचारा, हर दिल को सदा लुभावे॥

आधुनिक

हरयाणे की शान अखाड़ा

Performer: रणबीर सिंह बड़वासणी

अखाड़े की माटी में जो, अपना पसीना बहावे सै, वही पहलवान हरयाणे का, दुनिया में नाम कमावे सै॥ दूध जलेबी और बादाम, खाके जब दंगल में उतरे, धोबी पछाड़ और कलाजंग दांव, देख के बैरी सुध-बुध बिसरे। ओलंपिक में जब तिरंगा, शान से लहराया जावे, हर हरयाणवी का सीना, गर्व से चौड़ा हो जावे॥ रणबीर सिंह गावे रागनी, वीरों का वंदन करता सै, मातृभूमि की सेवा खातिर, हर पल आगे बढ़ता सै। कुश्ती और पहलवानी में, हरयाणे का नहीं जवाब, म्हारी माटी के लालों ने, पूरा किया हर सपना-ख्वाब॥

आधुनिक

सच्ची यारी की पहचान

Performer: मास्टर सतबीर

सच्चा यार वही जो विपता में, हंसकर हाथ बटावे, भीड़ पड़ी पर जो मुँह मोड़े, वो मित्र ना कहलावे॥ कर्ण और दुर्योधन की यारी, दुनिया आज भी गावे, प्राण दिए पर दिए वचन को, वीर कदे ना भुलावे। सुदामा के चावल खाके, कृष्ण ने तीनों लोक लुटाए, सच्ची मित्रता के आगे, भगवान भी शीश नवाए॥ मास्टर सतबीर कहे भाई, यारी का मान निभाना, मतलब की इस दुनिया में, सच्चा यार कमाना। दगाबाजी का फल बुरा हो, विश्वासघात ना कीजो, जो यार तुम्हारे खातिर लड़े, उसपर जान भी दीजो॥

आधुनिक

भाई-भाई का प्यार जगत में (सांग भरत मिलाप)

Performer: राजकिशन अगवानपुरिया

भाई-भाई का प्यार जगत में, सबसे अनमोल बताया सै, भरत ने भैया राम के खातिर, सारा राज ठुकराया सै॥ चौदह बरस की अवधि काटी, खड़ाऊँ सिंहासन धर दी, राम भक्ति के आगे जग की, सारी माया फीकी कर दी। आज के कलयुग में देखो, भाई-भाई से लड़े, एक गज जमीन के टुकड़े पीछे, कोर्ट कचहरी में खड़े॥ राजकिशन कहे सुनो भाई, रामायण की रीत सीखो, त्याग और प्रेम की मूरत बनके, जीवन में मीत सीखो। धन-दौलत तो आनी-जानी, भाई का साथ अनमोल सै, सच्चे भाई के बिना जगत में, जीवन का क्या मोल सै॥

आधुनिक

रणभूमि के मैदान में जब क्षत्रिय तलवार चलावै

Performer: राजकिशन अगवानपुरिया

रणभूमि के मैदान में जब क्षत्रिय तलवार चलावै, दुश्मन दल थर-थर कांपे, आगे कोई टिक ना पावै॥ कुरुक्षेत्र की धरती ऊपर, जब अर्जुन बाण चलावे, गांडीव की टंकार सुन के, कौरव सेना घबरावे। धर्म युद्ध की यह गाथा, सदियों तक गाई जावे, सत्य और न्याय की खातर, वीर पुरुष जान गँवावे॥ राजकिशन की बुलंद आवाज, रग-रग में जोश जगावे, हरयाणे की माटी का गौरव, पूरी दुनिया दोहरावे। अधर्म का नाश हुआ रण में, धर्म की जय-जयकार हुई, गीता का उपदेश गूंज उठा, सत्य की सदा बहार हुई॥

आधुनिक

पानी आली पाणी प्या दे, क्यों अनबोल खड़ी होगी

Performer: महाशय दयाचंद मायना

पानी आली, पानी प्या दे, क्यों अनबोल खड़ी होगी! के कुएँ का नीर सड़ गया, ठा के डोल खड़ी होगी? पानी आली, पानी प्या दे... पन्द्रह-सोलह-बीस बरस की, उमर तेरी रंग छांटन की, के लियाई थी, के ले जाणा, बांण छोड़ दे नाटन की। तेरी एक चीज दिल डाटण की रै, तेरी एक चीज दिल डाटण की, क्यों लाके मोल खड़ी होगी? पानी आली, पानी प्या दे, क्यों अनबोल खड़ी होगी! कैरी-कैरी आँख, तेरी जहरी-जहरी बात, ठहरी-ठहरी चाल, तेरी खिंचमा सा गात। खोल दिये बाल, तन्ने गिरा दिये जाल, कालजे पे यो मेरा छल्ला दिया तन्ने बाण। झूठ कोनी पावे, श्री दयाचंद की बाणी में, तू भीग री पसीने में, आग लाग री या पानी में॥ वो तिरछी नजर लाखा कर नै, तन्ने जान काढ़ ली मेरी, सांपण भरके होठा पे, तन्ने जीभ कसूती फेरी। या पतली कमर लरजती तेरी रै, या पतली कमर लरजती तेरी, दे के झोल खड़ी होगी? पानी आली, पानी प्या दे, क्यों अनबोल खड़ी होगी!

आधुनिक

फौज में जाके भूल ना जाइये प्रेम कौर नै

Performer: फौजी मेहर सिंह

हाँ दरजी के तै सीमा दिए मेरा लेडी मिन्टन सूट पिया, पायाँ के मा मन्ने पराह ऊँची एड्डी के बूट पिया। छम छम कर कै चालूँगी जणू फौजी जा रंग रूट पिया, तेरे बिना क्यूकर जीउ कैसे भरू सब्र की घूँट पिया... फौज में जाके भूल ना जाइये, तू अपनी प्रेम कौर ने, चिट्ठी-पत्तर भेजिया करिए, दिल के चोर ने। देश की रक्षा फर्ज तिहारा, सीना तान खड़े रहना, पर छुट्टी लेके घर को आना, मेरी बात भी सुनना॥ फौजी मेहर सिंह सरहद ऊपर, देश का मान बढ़ावै, फौजन घर पर बाट जोहती, मंगल गीत सुनावै। सैनिक और किसान हरयाणे की, अमर शान कहलावै, जिनके दम पे पूरा भारत, चैन की नींद सो पावै॥

आधुनिक

गाँव की चौपाल

Performer: दयाचंद मायना

चौपाल में बैठे बड़े-बुजुर्ग, हुक्के की नल गड़गड़ाती। खेत-खलिहान की बात करते, बारिश की राह मन में जाती। नीम की छाया में बैठे सब, गाँव की पंचायत लगती। यो चौपाल हमारी पाठशाला, जहाँ जिंदगी की राह मिलती।

आधुनिक

पानी की रागनी

Performer: रणबीर सिंह बड़वासणी

पाणी बचाओ भाई-बहनो, यो धन सबसे अनमोल। बूंद-बूंद को जोड़ के रखो, पाणी ही जीवन का मोल। नहर खेत सींचते जावे, कुएं से मीठा जल टोल। रणबीर कहे सुनो सब मिलकर, पाणी के बिना होगा रोल।

आधुनिक

मेले की रागनी

Performer: मान सिंह

हरयाणे का मेला लागा, ढोल-ढमाके बज रहे। नाच-गान और रंग-बिरंगी, हर तरफ झूले झूल रहे। फूलों की बहार आई, सब मिलकर खूब झूम रहे। यो हरयाणा का मेला सुंदर, सबके मन में खुशी भर रहे।

आधुनिक

किसान की रागनी

Performer: मांगेराम

खेत में हल चलाता किसान, पसीना बहाता दिन-रात। आसमान से बादल माँगे, कर ईश्वर से की जाए बात। फसल उगाई पूरे जतन से, बाजार में नहीं मिला दाम। मांगेराम कहे सुनो सरकार, किसान करे तो क्या काम?

आधुनिक

बेटी की रागनी

Performer: धर्मपाल सांगवान

बेटी है तो कल है म्हारा, बेटी पढ़ेगी तो घर चमकेगा। छोरी को मत समझो भार, इसके कारण गाँव दमकेगा। डॉक्टर इंजीनियर बनेगी यो, देश का नाम रोशन करेगी। साक्षी मलिक सी बेटी म्हारी, ओलंपिक में मेडल लावेगी।