पानी आली पाणी प्या दे, क्यों अनबोल खड़ी होगी
पानी आली, पानी प्या दे, क्यों अनबोल खड़ी होगी! के कुएँ का नीर सड़ गया, ठा के डोल खड़ी होगी? पानी आली, पानी प्या दे... पन्द्रह-सोलह-बीस बरस की, उमर तेरी रंग छांटन की, के लियाई थी, के ले जाणा, बांण छोड़ दे नाटन की। तेरी एक चीज दिल डाटण की रै, तेरी एक चीज दिल डाटण की, क्यों लाके मोल खड़ी होगी? पानी आली, पानी प्या दे, क्यों अनबोल खड़ी होगी! कैरी-कैरी आँख, तेरी जहरी-जहरी बात, ठहरी-ठहरी चाल, तेरी खिंचमा सा गात। खोल दिये बाल, तन्ने गिरा दिये जाल, कालजे पे यो मेरा छल्ला दिया तन्ने बाण। झूठ कोनी पावे, श्री दयाचंद की बाणी में, तू भीग री पसीने में, आग लाग री या पानी में॥ वो तिरछी नजर लाखा कर नै, तन्ने जान काढ़ ली मेरी, सांपण भरके होठा पे, तन्ने जीभ कसूती फेरी। या पतली कमर लरजती तेरी रै, या पतली कमर लरजती तेरी, दे के झोल खड़ी होगी? पानी आली, पानी प्या दे, क्यों अनबोल खड़ी होगी!