आधुनिकपारंपरिक सांग व लोकगीत
गाँव का बचपन और चौपाल की यादें
गायक / रचनाकार: धर्मपाल सांगवानहरयाणवीशौक अर्काइव्स
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रागनी के बोल (Complete Lyrics)
गाँव का वो भोला बचपन, चौपाल की वो मीठी बातें, कहाँ खो गईं वो खुशियाँ, कहाँ गईं वो शीतल रातें॥ कंचे खेलना, गिल्ली-डंडा, बागों से आम चुराना, ताई के हाथ का माखन और, गुड़ की रोटी खाना। आज शहर की भीड़ में खोकर, दिल रोता है पछताता है, गाँव की वो मिट्टी की खुशबू, रह-रह के याद आता है॥ धर्मपाल सांगवान कहे भाई, गाँव की जड़ को मत छोड़ो, अपनी संस्कृति और धरोहर से, कभी ना नाता तोड़ो। पीपल की छांव चौपाल का ठाठ, दुनिया में कहीं नहीं पावे, गाँव का भोला भाईचारा, हर दिल को सदा लुभावे॥