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रागनी के बोल (Complete Lyrics)
चौपाल में बैठे बड़े-बुजुर्ग, हुक्के की नल गड़गड़ाती। खेत-खलिहान की बात करते, बारिश की राह मन में जाती। नीम की छाया में बैठे सब, गाँव की पंचायत लगती। यो चौपाल हमारी पाठशाला, जहाँ जिंदगी की राह मिलती।
चौपाल में बैठे बड़े-बुजुर्ग, हुक्के की नल गड़गड़ाती। खेत-खलिहान की बात करते, बारिश की राह मन में जाती। नीम की छाया में बैठे सब, गाँव की पंचायत लगती। यो चौपाल हमारी पाठशाला, जहाँ जिंदगी की राह मिलती।