शास्त्रीयपारंपरिक सांग व लोकगीत
अकलबन्द इस दुनियां के मैं बिन टोहये पावैं सै
गायक / रचनाकार: पंडित लखमीचंदहरयाणवीशौक अर्काइव्स
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रागनी के बोल (Complete Lyrics)
अकलबन्द इस दुनियां के मैं बिन टोहये पावैं सै, एक दमड़ी की कीमत ना पर लाल बणे चाहवैं सैं॥ कुछ तै खता हो मात-पिता की जन सुत लाड लड़ाते, 12 वर्ष तै उपर होज्यां धन्धे सिर ना लाते। बैठ चौकड़ी चांडाला की खोटा सतसंग पाते, मात-पिता कहैं काम करण की नहीं कमा कै लाते, बेटा समझ कै धमका दे तै ये जूता ठावें सैं॥ लिखै पढै ना खेती ना क्यारी ना रीत बंडया की चालै, शौकीन काया पड़ै काम बिन लेज्यां देश निकाले। इसे उत घरवासे तै तै सच्चे राम उठाले, न्यूं के काम करया जा मरकै, भीख मांग कै खाले, कहैं कितै मोटर सीखूंगा, दिल्ली सिखलावैं सै॥ लखमीचंद कहे कर जोड़ कै सुणियो ज्ञान की बात, सच्ची मेहनत रंग लावेगी, कटेगी काली रात। मात-पिता का फर्ज निभाओ, छोड़ो आलस की जात, सच्चे मन तै काम करोगे, मिले सफलता की सौगात॥