शास्त्रीयपारंपरिक सांग व लोकगीत
एक चिड़िया कै दो बच्चे थे (सांग रूप बसंत)
गायक / रचनाकार: पंडित लखमीचंदहरयाणवीशौक अर्काइव्स
सभी रागनियाँ
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रागनी के बोल (Complete Lyrics)
एक चिड़िया कै दो बच्चे थे, दोनों पेड़ पै रहया करते। कागज़ की एक कुटिया थी उनकी, दाने चुग-चुग खाया करते॥ आई आंधी टूटा पेड़, दोनों बच्चे बिछड़ गए, एक पड़ा कसाई के घर, एक साधु के आश्रम गए। कसाई का बच्चा गाली सीखे, साधु वाला राम भजे, संगत का फल पड़ै जगत में, जैसी संगत तैसी मते॥ लखमीचंद कहे सुन भाई, सत्संग में मन लाईए, बुरे कर्म तै दूर रहिके, नेक कमाई खाईए। जीवन का यो सार समझ ले, करम धर्म अपनाइए, सच्चे मन से प्रभु भजन कर, अंत समय सुख पाइए॥